प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी व उसकी पत्नी पूनम त्रिपाठी के खिलाफ पांच धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध करने के आदेश, पीड़िता को पांच साल बाद मिला अदालत से न्याय

by Kakajee News

रायगढ़। न्यायिक मजिस्ट्रेड प्रथम श्रेणी पुनीत समीक्षा खलखो ने रायगढ़ जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पूर्व में कार्यरत प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी व उसकी पत्नी पूनम त्रिपाठी के खिलाफ 294, 506, 500, सहपठित धारा 511 एवं सहपठित धारा 34 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध करने के आदेश जारी किये हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेड प्रथम श्रेणी पुनीत समीक्षा खलखो ने यह आदेश मंजु अग्रवाल द्वारा पांच साल पहले 6 अपै्रल 2021 को दायर एक परिवाद पत्र के आदेश की सुनवाई के बाद जारी किया है। बीते पांच साल से महिला न्याय के लिये लगातार प्रयास कर रही थी और समस्त गवाह एवं सबूतों के आधार पर माननीय न्यायलय द्वारा सुनवाई के बाद प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी व उसकी पत्नी पूनम त्रिपाठी के खिलाफ 294, 506, 500, सहपठित धारा 511 एवं सहपठित धारा 34 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध करने के आदेश जारी किये हैं। वर्तमान में मुकेश त्रिपाठी राजधानी रायपुर स्थित एसीबी कार्यालय में कार्यरत हैं। इस मामले की पैरवी अधिवक्ता सिराजुद्दीन ने की थी।
अभियोजन से मिली जानकारी के अनुसार बीते 3.11.2020 को परिवादिनी जब कोतरा रोड स्थित सावित्री नगर में मुकेश त्रिपाठी के घर में अपने पति मनीष अग्रवाल को बुलाने के लिये गई थी इसी दौरान मुकेश त्रिपाठी व उसकी पत्नी पूनम त्रिपाठी ने परिवादिनी मंजु के खिलाफ अश्लील गालियां बकते हुए उसे  सार्वजनिक तौर पर अपमानित करते हुए धमकी भी दी थी और इतना ही नही इस घटना के बाद मुकेश त्रिपाठी ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए उसी दिन अपनी पत्नी पूनम त्रिपाठी द्वारा शिकायत कराते हुए परिवादिनी मंजू के खिलाफ कई धाराओं के तहत सिटी कोतवाली में अपराध पंजीबद्ध कराते हुए धमकियां जारी रखी थी। इस दौरान परिवादिनी ने अपने साथ होनें वाले अन्याय की गुहार 3.11.2020 को सिटी कोतवाली में लिखित आवेदन के जरिये लगाई थी लेकिन मुकेश त्रिपाठी के दबाव से सिटी कोतवाली द्वारा शिकायत पर कार्रवाईक करना तो दूर उल्टे ही पीड़िता को धमकाना व प्रताडित करना जारी रखा था। इतना ही नही सामाजिक व परिवारिक रूप से भी लगातार उसका भयादोहन किया जाता रहा।
इस अन्याय से पीड़ित होकर परिवादिनी ने माननीय न्यायालय में परिवाद पत्र दायर करते हुए न्याय की गुहार लगाई थी जिसमें समस्त बिंदुओं व सबूतों को दरकिनार करते हुए प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी द्वारा किये जा रहे अन्याय को न्यायालय के समक्ष रखा था। इतना ही नही बीते पांच साल से अपने परिवाद पत्र के जरिये न्याय के लिये लड़ रही परिवादिनी को बीच-बीच में डराया धमकाया भी गया उसके बावजूद भी उसने अपनी लड़ाई जारी रखी। न्यायलय के समक्षा पीड़िता ने अपने गवाहों व साक्ष्यों के माध्यम से यह बताने में अपने पूरे पांच साल से ज्यादा का समय लगा दिया।
इस परिवाद पत्र की सुनवाई के बाद सम्मानीय न्यायालय द्वारा बीते 12 मार्च 2026 को पूरी सुनवाई के बाद प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी व उसकी पत्नी पूनम त्रिपाठी के खिलाफ 294, 506, 500, सहपठित धारा 511 एवं सहपठित धारा 34 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध करने के आदेश जारी किये हैं और अपने आदेश में न्यायिक मजिस्टेªड प्रथम श्रेणी पुनीत समीक्षा खलखो ने समस्त धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध करने के आदेश जारी करते हुए आरोपीगण को 16 अपै्रल को न्यायालय में उपस्थित होनें को कहा है।
बहरहाल पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लंबे समय से कार्यरत प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी व उसकी पत्नी पूनम त्रिपाठी के खिलाफ 294, 506, 500, सहपठित धारा 511 एवं सहपठित धारा 34 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध करने के आदेश जारी होनें के बाद पीड़िता ने अपने अधिवक्ता सिराजुद्दीन के माध्यम से बताया कि न्यायालय से उनके परिवाद पत्र की सुनवाई के बाद जो न्याय मिला है उससे उन्हें काफी हद तक न्याय मिला है और यह भी कहा है कि पुलिस विभाग में कार्यरत ऐसे लोग अपनी कार गुजारी को छुपाने के साथ-साथ महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार व सार्वजनिक अपमान करने के साथ-साथ परिवार के बीच विवाद उत्पन्न कराते हैं, ऐसे लोगों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नही होनें से उनका मनोबल लगातार बढ़ता है।

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