धरमजयगढ़ से 50 से अधिक ग्रामीण पहुंचे रायगढ़ SECL कार्यालय, शिक्षक आशीष विश्वास ने GM के सामने उठाई कड़ी आपत्ति. क्या हैं GPS सर्वे जो लोगों के लिए बनेगा मुसीबत… पढ़े पूरी खबर…

by Kakajee News

 

धरमजयगढ़ क्षेत्र के दुर्गापुर प्रस्तावित कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में करीब 50 ग्रामीण, जनप्रतिनिधि 2 जुलाई को रायगढ़ स्थित SECL कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने महाप्रबंधक (GM) से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं और परियोजना को लेकर विरोध दर्ज कराया। बतादें की इस विरोध को एक कुशल नेतृत्व के रूप में आशीष विश्वास का साथ मिला। करीब 2 घंटे तक secl कार्यालय में बैठक चली जिसमें सबसे ज्यादा अगर ग्रामीणों के मुद्दे और परेशनीयों को कंपनी के कर्मचारियों से साझा इन्होने ही किया। बैठक में कई नेता मौजूद थे जैसे अनिल सरकार,भरत साहू व अन्य पर वहा एक समाज के सम्मानिय पढ़े लिखें जागरूक शिक्षक की बातों नें सभी का ध्यान अपनी ओर खींचे रखा। लोगों को उनसे यही उम्मीद थी और वे लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे और खूब जमकर कंपनी का विरोध किया। लगभग 2 घंटे हुए बैठक में देखा जाए तों कोयला खदान को चुनौती देते हुए 1 घंटे से भी अधिक समय नें शिक्षक आशीष नें विरोध जताते हुए अपनी बातों को प्रबंधन के सामने प्रमुखता से रखा। आशीष विश्वास समेत कई नेताओं नें कंपनी के सामने ग्रामीणों की मांगो को रखा अंत तक कोई समझौता नहीं हो सका जिसके बाद ग्रामीणों नें जिला कलेक्टर से मुलाक़ात की….।

ड्रोन सर्वे में देरी से ग्रामीणों को होगा भारी नुकसान, अब GPS सर्वे की चर्चा ने बढ़ाई चिंता

बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई। बताया जा रहा है कि ड्रोन सर्वे में लगातार हो रही देरी के कारण अब GPS सर्वे की संभावना बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार यदि GPS आधारित सर्वे किया जाता है, तो कई मामलों में वर्षों पुराने रिकॉर्ड और उपग्रह चित्रों के आधार पर भूमि की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में करीब 10 वर्ष पहले की स्थिति भी आधार बन सकती है, जिससे मुआवजे के निर्धारण पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसका एक ही उपाय हैं किसान जागरूक बने और अवैध निर्माण का विरोध करें।

आशीष विश्वास, अनिल सरकार व अन्य लोगों नें बात रखा की ज़मीन के अंदर से जो कोयला निकलेगा वो तों तय मूल्य के अनुसार ही बेचा जाएगा, जहा जमीन का बाजार मूल्य 31 लाख हेक्टयर हैं वहा का भी कोयला अगर अनुमानित 20 रूपये किलो में बिकेगा तों जहा का मुआब्जा 21 लाख हेक्टयर हैं वहा का कोयला भी तों 20 रूपये किलो ही बेचा जाएगा। अगर निचे के कोयले का मूल्य समान्य हैं तों ऊपर के ज़मीन के मूल्य में लाखों का अंतर क्यों.. सबको समान्य मूल्य मिले…

हालिया निर्माण कार्य पर पड़ सकता है असर, ग्रामीणों में बढ़ी बेचैनी

ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि यदि मुआवजा पुराने रिकॉर्ड या Gps सर्वे के आधार पर तय किया गया, तो हाल के वर्षों में बनाए गए शेड, मकान या अन्य निर्माणों का लाभ नहीं मिल पाएगा। इससे हाल ही में तेजी से हो रहे शेड निर्माण कार्य करने वाले कई लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हालांकि GPS सर्वे और मुआवजा निर्धारण को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इस संभावना ने प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर SECL और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है कि परियोजना, सर्वे और मुआवजे को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

 

🔥 एक महत्वपूर्ण बात मीटिंग में सामने आई भले किसी भी उद्देश्य से ड्रोन सर्वे में देरी करवाया जा रहा हो और लगातार शेड निर्माण का कार्य जो धरातल पर चल रहा जिसके चलते कंपनी या सरकार को अगर यह महसूस होता हैं कि जितने का उन्हें खनिज प्राप्त हो रहा अगर उससे ज्यादा उन्हें खर्च दिखाई पड़ता हैं तब कोई कड़ा कदम उठाया जा सकता हैं ऐसे में सालों पुराने जीपीएस तस्वीरों के हिसाब से भी सर्वे करवाया जा सकता हैं जिससे आज जो भी धड़ाधड निर्माण हो रहें हैं वह दिखाई ही नहीं पड़ेगा। जिससे वास्तविक किसानों और हितग्राहियों का खूब नुकसान देखने को मिलेगा क्युकी कुछ लोगों के कार्यों की भरपाई उन्हें भी भुगतनी पड़ेगी। वही बैठक में शिक्षक आशीष विश्वास ने प्रमुखता से अपनी बात रखते हुए ग्रामीणों की चिंताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की सहमति, आजीविका, वनाधिकार और उचित मुआवजे जैसे मुद्दों पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। बैठक में कई ऐसे प्रमुख जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे जो स्वयं प्रस्तावित खदान क्षेत्र से प्रभावित बताए जा रहे हैं।

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